आज किसी भी दल के पदधारी के मायने क्या हैं?

चापलूसों, रिश्तेदारों, पिछलग्गुओं और वफादारों को मिलते हैं पद. सेवक और अनुचरों को भी मिलते रहा है इनाम. यस बॉस की इर्द-गिर्द घुमती रही है राजनीति. जलवा बिखेरनेवालों को भी मिल जाता है लौली पॉप. सर्वस्व न्योछावर करनेवालों को भी बनाये जाते हैं प्रभारी, सागाथानिक पदधारी और आब्जर्वर. राजनीति के कई रूप., लेकिन महत्वाकांक्षी, इमानदार, स्वाभिमानी, समर्पित और तेज-तर्रार लोगों को हासिये पर रखने को प्रायः सभी बचनबद्ध.

आज प्रायः दल के प्रखंड या मंडल अध्यक्षों का चुनाव नहीं होता. सारे मनोनीत होते हैं. कोई क्षेत्र के विधायक का चापलूस होता है, कोई पराजित राजनेता का पिछलग्गू होता है. कोई उस क्षेत्र से राजनीति की चाह रखनेवाले नेताजी का वफादार होता है.

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