जगदीश राय के शब्दों में आरक्षण का सच

जाति के नाम पर मत देकर अफसोस करनेवाले उपेक्षित जगदीश राय सचिवालय में तम्बू देकर चालीस वर्षों से चाय बेचते हैं: —- *** बी. बी. रंजन ब्रेक्स द साइलेंस: 

Image may contain: 1 person, standing and outdoor

Image may contain: 5 people, people smiling, close-upजगदीश राय का कहना है कि आरक्षण सरकार के पेट में गया. बकौल राय सारा आरक्षण का लाभ डाली लगानेवालों को मिला, लेकिन गरीब और जरूरतमंद वंचित रह गए. उनके पांच बच्चे हैं, सभी प्राइवेट कार्य करते हैं. इनके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिला. 
बकौल राय लालू जी अपने साले और परिजनों को लाभ पहुंचाने में व्यस्त रहे और इन लोगों को जाति के नाम पर मतदान करना बेकार गया. बगल में Image may contain: 3 people, beardबैठे एक गोप जी ने कहा कि रेलवे मंत्रालय संभाल रहे लालूजी के दरबार में प्रतिदिन चार-पांच सौ बेरोजगार छात्रों की उपस्थिति होती थी और सबों को डंडा दिखाकर भगा दिया जाता था.
लालूजी के साले सुभाष यादव और साधू यादव कभी सासद, कभी विधान पार्षद हुआ करते थे. राबडी देवी मुख्यमंत्री थी, तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री है, तेजप्रताप यादव स्वास्थ्य मंत्री हैं, मीसा भारती सांसद हैं. पूरा परिवार चारा, भूमि और जमीन घोटाले में चर्चित है, लालू यादव का पूरा कुनबा अकूत संपत्ति से भरा है, लेकिन जाति के नाम पर मत देकर अफसोस करनेवाले उपेक्षित जगदीश राय सचिवालय में तम्बू देकर चालीस वर्षों से चाय बेचते हैं.
क्या जगदीश राय से समझेंगे. जगदीश राय तो महज एक हल्की झांकी है, पूरा कुनबा बाकी है.

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