भूमिहारों को राजनीति नहीं आती

पालीगंज: दलगत नहीं, जातिगत होता है चुनावी निर्णय

हर बार दूर दृष्टि के दावेदार और समीकरण बैठाने के महारथी होने का स्वांग करनेवाले भूमिहार मतदाताओं की नीति को हमने हर बार विफल होते देखा. भूमिहारों को राजनीति नहीं आती, बिना मांगे समर्थक की घोषणा ही इनकी सबसे बड़ी राजनीतिक विफलता 

कभी नहीं हुआ दलीय या सैद्धान्तिक चुनाव

प्रारंभ से ही वैचारिक राजनीति का अभाव  

पालीगंज आजादी के बाद से ही दल या सिद्धान्त के प्रति समर्पित नहीं रहा. पालीगंज दो जाति आधारित नेताओं की मजबूत पकड़ का केंद्र बन गया और विकास की योजनाएं भी इसी आधार पर बनतीं रहीं. रामलखन सिंह यादव कांग्रेस की टिकट पर मैदान में आये तो यादवों का समर्थन मिला और दूसरी बार कांग्रेस अर्स या जनता दल की टिकट पर आये तो भी यादवों की पहली पसंद बने. चन्द्रदेव प्रसाद वर्मा को राजद की टिकट पर यादवों के मतों को झटकने में कामयाब तो रहे लेकिन अंशतः. वह भी तब जब जबाब में कोई यादव उम्मीदवार मैदान में नहीं था. अशोक वर्मा को लालू यादव की पार्टी से टिकट मिलने के बाद भी यादव मतदाताओं ने दीनानाथ यादव को अपना समर्थन दिया था और जनार्दन शर्मा चुनाव जितने में कामयाब रहे थे. यूरिया घोटाले के आरोपी प्रकाशचन्द्र और रामलखन सिंह यादव को बी यादव मतदाताओं का समर्थन मिलता रहा और घोटाला, जेल यात्रा और और कोलकाता के देह व्यापार के मसले निरर्थक रहे. किसानों और मजदूरों से जुड़ा मामला भी पालीगंज की चुनावी जातीय आग में जनता की अदालत में बेकार गया. जयवर्द्धन यादव को वंशगत राजनीति अक लाभ आज भी मिल रहा है. जयवर्धन का इस क्षेत्र या क्षेत्र की जनता से कोई भी जुड़ाव नहीं रहा है. लेकिन जाति की वैशाखी और रामलखन सिंह यादव का पौत्र के साथ राजद की टिकट मायने रखता है. पहली प्राथमिकता जाति है, फिर बाकी तत्व दावेदारी की सशक्तता निर्धारित करते हैं. दीनानाथ और जयवर्धन की यादवगिरीऔर पिछड़े-दलित मतों की गोलबंदी के के उलझन में ही कभी उषा विद्यार्थी के माथे पर सेहरा बंध गया था.

दूसरी ओर कन्हाई सिंह ने जब भूमिहारों को जनता पार्टी के चन्द्रदेव् वर्मा को समर्थन देने का इशारा किया तो भूमिहारों का समर्थन वर्मा को मिला. कन्हाई सिंह जब कांग्रेस में थे तो  सवर्ण मतों का रूझान कांग्रेस की ओर रहा. कन्हाई सिंह जब निर्दलीय अपनी किस्मत आजमाने लगे तो भी सवर्ण  मतदाताओं ने उन्हें जबर्दस्त समर्थन दिया.

भूमिहारो मतदाताओं ने पालीगंज में जाति से ऊपर उठकर कई बार मतदान किया है, लेकिन उन्हें निराशा जनक जबाबी कार्रवाई मिलता रहा है. चंद्रदेव प्रसाद वर्मा के समर्थन के एवज में कोइरी मतदाताओं ने कन्हाई सिंह का विरोध किया और कन्हाई सिंह को गोली लगाने का आरोप भी कोइरी जातिवालों के ही खिलाफ था.भूमिहार की चाकरी कर भूमिहारों के  ही खिलाफ अभियान चलाने के लिए सुर्ख़ियों में रहनेवाले सूर्यदेव सिंह को भी भूमिहारों का भारी समर्थन मिला था. कभी श्रीकृष्ण सिंह की छत्रछाया में राजनीति करनेवाले और केबी सहाय के चहेते होने की सुर्खिया बटोरनेवाले रामलखन सिंह यादव की छवि भूमिहार विरोधी थी, लेकिन १९८० के विधानसभा चुनाव में रामलखन सिंह को भूमिहारों का जोरदार समर्थन मिला था. चुनावी जीत के साथ आरक्षण के मसले पर रामलखन सिंह यादव ने सवर्णों को निराश किया था जबकि सहार की दलित विधायिका ज्योति ने आन्दोलन चलाया था. चर्चा थी की सवर्णों के इस भारी समर्थन को यादव ने भाकपामाले की गतिविधियों से त्रस्त सवर्णों की बेवसी बताया था.

पालीगंज के सवर्ण अपनी इस ढुलमुल रवैये के कारण ही उपेक्षित रहे हैं. उनका अपन कोई स्टैंड नहीं रहा है. चारा घोटाले के आरोपी लालू प्रसाद को स्वजातीय आकाओं ने शहादत दर्शाया, साजिश बतलाया. लेकिन भूमिहार मतदाता हर बार समीकरण बैठने की बात करते रहे. हर बार दूर दृष्टि के दावेदार और समीकरण बैठाने के महारथी होने का स्वांग करनेवाले भूमिहार मतदाताओं की नीति को हमने हर बार विफल होते देखा. चुनावी जीत के बाद भूमिहार प्रतिनिधि का हर बार विरोध करनेवाले भूमिहार अन्य जातियों के सामने नतमस्तक होते रहे हैं. अन्य दरबार में उपेक्षित होने के बाद भी उन्हें ठीकठाक बताया जाता रहा है.  

ब्रह्मेश्वर सिंह के पुत्र इन्दूभूषण सिंह को भी सवर्ण मतदाताओं ने नकार दिया और जाति से ऊपर उठकर कभी लालू प्रसाद के चहेते रहे रामकृपाल यादव के पक्ष में मतदान किया. नरसंहार के दौर में रामकृपाल यादव ने किसी भी सवर्ण बहुल गाँव में मातमपुर्सी तक नहीं की थी, सवर्णों के नरसंहार में मामले में उनका कोई भी सार्वजनिक बयान तक नहीं आया था.

दल बदलनेवाले अशोक वर्मा और चंद्रदेव वर्मा को कोइरी मतों का समर्थन मिलता रहा. भाकपा माले से आनेवाले नन्द कुमार नंदा को भी कोइरी मतदाताओं ने हाथोंहाथ लिया. इस निर्णय में जाति के सिवा कहीं कोई सिद्धान्त नहीं था. कोइरी मतदाता जातीय समर्थन के सिवा कुछ सोचते ही नहीं.

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