नौबतपुर में रंजय की हत्या जंगलराज पार्ट-2 पर मुहर.

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नौबतपुर में रंजय की हत्या जंगलराज और प्रशासनिक विफलता का परिणाम.

राज्य में जंगल राज का असर अब चारो ओर देखने को मिल रहा है. 1990 के जंगल राज में नौबतपुर जलने लगा था. अपराधी बेख़ौफ़ हो गए थे और रंगदारी की वसूली के लिए हाथों से लिखे पत्र लेकर ‘भईया’ के शूटर व्यापारियों और भठ्ठेदारों तक पहुंचते थे. बाजार में कई वसूलीकर्ता थे और बाजार के अनुसार रंगदार बदल जाते थे. अमरपुरा में महतो जातिवालों का दबदबा था तो नौबतपुर में भूमिहारों का वर्चस्व था. तब पंचम-दिलीप और रविन्द्र-सरोज गिरोह की तूती बोलती थी. बाद के दौर में लुल्लन-डॉक्टर का दौड़ आया और अब नये छुटभैये रंगदारों के संघर्ष का दौर है. नौबतपुर में अभी वर्चस्व की लड़ाई चल रही है और लगातार होनेवाली हत्याओं से यह स्पष्ट है की आनेवाले दिनों में रंगदारी टैक्स की वसूली को लेकर वर्चस्व की लड़ाई गंभीर होगी.

बहरहाल कई भूमिहारों की हत्या हो चुकी है और इसके जबाबी कार्रवाई की प्रबल संभावना है. लुल्लन की हत्या की जबाबी कार्रवाई के बाद भी नौबतपुर पुलिस आराम फरमा रही है. तरारी का खून और रंजय की हत्या के बाद क्षेत्र दहल गया है और नौबतपुर के लोग भावुक हो चले है.

नौबतपुर क्षेत्र के रंगदारों का मुख्य पेशा रंगदारी की वसूली रहा है और इसे लेकर ही हत्याओं का सिलसिला नहीं थमता. आज एक हत्या करनेवाला अपराधी कल बाजार कवर कर वसूली करना चाहता है. नौबतपुर में रंगदारों के सेवकों और आदेशपालों की कमी नहीं है. बेरोजगारी से परेशान युवकों को भारी आय का जरिया आकर्षित करता है, लेकिन नौबतपुर पुलिस और प्रशासनिक महकमा अभी शिथिल है और भविष्य में होनेवाली खतरनाक वारदातों को रोकने की दिशा में चौकसी नहीं दिखती. पुलिसिया शिथिलता के कारण अभी हत्याओं का सिलसिला जरी रहने की संभावना है. यह नौबतपुर जंगलराज-2 की शुरूआत है.

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