नौबतपुर: रंजय की हत्या सत्य की हार: बी.बी. रंजन.

पंचम महतों के शहादत दिवस पर सभा को संबोधित कर चुके हैं पूर्व विधायक अनिल कुमार 

आपसी सौहाद्रता कायम करने की कोशिश में मौत की बलिवेदी पर कुर्बानी देनेवाले मानवीय गुणों से ओतप्रोत संवेदनशील रंजय की शहादत को  कोई शायद ही याद रखेगा. 


आज राह चलते होने वाले बलात्कार, हत्या और अपहरण का विरोध बंद हो गया है. अपराधी बेख़ौफ़ हो गए हैं. दुर्घटनाग्रस्त लोगों को कोई अस्पताल पहुंचानेवाला नहीं मिलता और उपचार के अभाव में कई लोगों की मौत हो गयी है. पहले पुलिसिया खानापूर्ति के बाद उपचार की शुरूआत जैसे व्यर्थ की छीछालेदर से लोग घायलों की सहायता करने से बचते थे और कई घायलों को अपनी जान गंवानी पड़ती थी.

अब आपस में झगड़ रहे लोगों को देखकर भी मुँह फेरनवालों की संख्या काफी है. गिने-चुने लोग ही किसी विवाद के समाधान के लिए सक्रियता दिखा पाते हैं. रंजय को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती, यदि उसने बीच-बचाव नहीं किया होता. आज उसके परिजनों को रंजय की उदारता और सवेदंशीलता का मलाल है. अपराध की दुनियाँ में बदनाम नौबतपुर बाज़ार इस घटना को कुछ ही दिनों के बाद आयी-गयी बात मान लेगा, प्रशासन खानापूर्ति कर आराम फरमाने लगेगा, लेकिन भविष्य में किसी निर्दोष के साथ बकवास करनेवाले बेख़ौफ़ अपराधियों को कोई भी रोकने की जुर्रत नहीं करेगा. इस समस्या से कहीं भी कोई भी पीड़ित हो सकता है और अपराधियों का मनोबल उंचा उठ सकता है.

ताबड़तोड़ हत्याओं पर नकारा पुलिस की गतिविधियों की यथावत स्थिति भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति की संभावना को प्रबल कर रही है. नौबतपुर अंचल कार्यालय एवं कई चौक-चौराहों पर अपराधियों और मनचलों का जमावड़ा लगा रहता है और आने-जाने वाली महिलाओं के साथ बदसलूकी के उदाहरण तो रोज मिलते हैं.

अमरपुरा बाजार से कभी महिला को भी उठाने की कोशिश हुई थी. रामाधार सिंह जैसे कई निर्दोषों की हत्या कर दी गयी थी. आपराधिक पृष्ठभूमि के कई लोग कई क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. नौबतपुर में अपराधियों की राजनीतिक ताजपोशी होती रही है. इस क्षेत्र के अपराधियों को शहीद की तरह महिमामंडित किया जाता रहा है और तत्कालीन स्थानीय विधायक अनिल कुमार ऐसे कार्यक्रमों में शरीक भी होते रहे हैं.



September 18 · पंचम महतो की शहादत दिवस पर सभा को संबोधित करते पूर्व विधायक अनिल कुमार. 18 सितम्बर को SHRI ANIL KUMAR के फेसबुक पर पोस्ट की गयीं तीन तस्वीरें. पालीगंज एक्सप्रेस इन तस्वीरों की पुष्टि नहीं करता. अभी तक इस पोस्ट को 373 लाइक  और अनगिनत नकारात्मक कमेंट मिले है.

यदि यह संबोधन सत्य है तो यह देश के सपूतों की शहादत का मखौल है और इससे अपराधी प्रवृति के लोगों का मनोबल बढेगा. पंचम महतो की आपराधिक पृष्ठभूमि थी, लेकिन अमरपुरा में पंचम महतो सहित अन्य दो-तीन लोगों की हत्याओं को धूमधाम से शहादत दिवस के रूप में मनाया जाता है और इसे प्रचारित किया जाता है. कई गणमान्य लोग इस गैरकानूनी कार्यक्रम में शरीक होकर अपने मतों की पोटली को मजबूत करते दिख जाते हैं. आज रंजय की हत्या की मातमपुर्सी में शहीद होनेवाले कई लोग पंचम जैसे लोगों के सवालिया शहादत दिवस में मुख्य भूमिका निभाते रहे हैं, लेकिन आपसी सौहाद्रता कायम करने की कोशिश में मौत की बलिवेदी पर कुर्बानी देनेवाले मानवीय गुणों से ओतप्रोत संवेदनशील रंजय की शहादत को शायद ही कोई याद रखेगा. लोकतान्त्रिक पद्धति में भरोसा रखने का दावा करनेवाले अनिल कुमार बिक्रम का तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके  हैं. एक जिम्मेदार नेता से जनता जानना चाहती है कि शहीद किसे कहते है और शहादत क्या होती है?

 

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