नौबतपुर: समय के पाबन्द नहीं हैं शिक्षक

नौबतपुर के कोपा मोड़ पर दिन के दस और ग्यारह बजे तक सुदूर देहात में जानेवाली शिक्षिकाओं और शिक्षकों की जमात दिखती है. पटना से आने-जाने वाले शिक्षक ढाई और तीन बजे ही विद्यालय छोड़ देते हैं. प्रभारी या प्रधानाध्यापक छात्रों के हितों की उपेक्षा कर इन गैरापाबंद शिक्षकों की सहानुभूति बटोरते हैं. सरकार पूरा वेतन देती है, लेकिन पढाई आधी- अधूरी भी नहीं होती. गरीबों की सरकार में गरीबों के बच्चों को न तो संतुलित आहार मिल पाता है, न ही शिक्षा मिल पाती है. चौतीस वर्षों से गरीबों, पिछड़ों, अल्पससंख्यकों और दलितों की सरकार है. सताईस वर्षों से नीतीश-लालू के सामाजिक न्याय के ढिढोरो की युगलबंदी जारी है.

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