पालीगंज में चहुँओर अराजकता, लेकिन जयवर्धन को जनावेदन चाहिए

जनसमस्याओं पर जनावेदन दें तो निश्चित कार्रवाई  – जयवर्धन  

ठीक है, चुनाव के बाद मैंने पालीगंज की समस्याओं को नहीं उठाया है.  मेरे पास समय की कमी है- रामजनम

MANJUSHA RANJANमुझे तो मिलते हैं सारे बंद स्वास्थ्य उपकेन्द्र, चिकित्सकों की निजी क्लिनिक पटना में- मंजूषा 

   मंजूषा, कल्याणपुर 

स्वास्थ्य उपकेन्द्र चलता है, डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था है – उपाधीक्षक पालीगंज अनुमंडलीय  अस्पताल 

पालीगंज एक्सप्रेस एक अच्छी पहल- पूर्व मुखिया रानीपुर-कुरकुरी पंचायत (पालीगंज प्रखंड)

पालीगंज में शिक्षक विशुनदेव सिंह की मौत और दुल्हिनबाज़ार अंचल में किसानों से वसूली की खबरों के बाद पालीगंज एक्सप्रेस की खबरों की पुष्टि हो गई है. पालीगंज एक्सप्रेस पालीगंज में व्याप्त अराजकता पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी तोड़ने की जरूरत पर बल दिया था और इस बाबत राजनेताओं को जगाने की कोशिश भी की थी. हम पालीगंज क्षेत्र की जनता की दुर्दशा से आम आवाम, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराते रहे हैं.

 

पालीगंज की राजनीति में कभी सक्रिय रहनेवाली उषा विद्यार्थी के विधायिकी काल में भी अस्पतालों, अंचल और प्रखंड कार्यालयों और विद्यालयों की स्थिति बदहाल थी, लेकिन एक बार किसानों की समस्या पर उषा ने पालीगंज और दुल्हिनबाज़ार अंचल में हाय-तौबा मचाया था.

Usha VidyarthiAshok Verma's profile photo

रामजनम शर्मा भी पालीगंज क्षेत्र से चुनावी फतह के दावेदार रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में व्याप्त समस्याओं के निदान के प्रति उनकी कोई रूच नहीं देखी गई है. मातमपुर्सी, यज्ञों और शुभ प्रयोजनों में महज उपस्थिति को छोड़ दें तो रामजनम शर्मा की चर्चा अनर्गल हो जाती है. उषा विद्यार्थी क्षेत्र में  

समय देती थीं, लेकिन उन पर आवास पर लोगों से देर से मिलने और अफसरशाही रवैया अपनाने का आरोप है. फिर पालीगंज में राजनीति को नकारात्मक मोड़ देनेवाली एक राजनैतिक मुखौटा धारक ठेकदार लॉबी की सक्रियता भी उषा को परेशान करती रही थी. उषा पर अकूत सम्पति अर्जित करने की चर्चा है. 

पालीगंज की ठेकादारीजनित राजनीतिज्ञों की लॉबी किसी भी ईमानदार या समर्थ और समर्पित राजनीतिज्ञ को अपनी पैठ बनाने से रोकने में

अपनी एकजुटता प्रदर्शित करती रही है. लेकिन पालीगंज की समस्याओं की रामजनम शर्मा ने कभी नोटिस नहीं ली. पालीगंज की नकारात्मक राजनीतिज्ञों की लॉबी ने भी भ्रश अधिकारियों से मिलकर अवैध धन-संचय का कार्यक्रम चलाया. क्षेत्र के विकास और ईमानदारी की इशल के रूप में उन्होंने प्रखंड कार्यालयों में तोड़फोड़ की, अंचल कार्यालय के गेट पर अपनी बेकार की उपस्थिति दर्शायी, आय-आवासीय-जाति भर अपने आपको सीमित रखा और वृद्धा-पेंशन को तुरूप का पत्ता साबित करने की कोशिश की. इस लॉबी की सारी राजनीति जनता को जागरूकता से दूर राकहने में गई. जनता की जागरूकता में इनकी राजनैतिक पराभव के बीज छिपे हैं. जनता को सशक्त और आत्मनिर्भर बनने पर इनकी राजनीतिक दूकाने बंद होने लगतीं हैं. पालीगंज एक्सप्रेस जनता को सजग, स्वावलंबी और सशक्त बनाने की मुहिम चलाता है. जनप्रतिनिधियों की चिरौरी पर विराम की की वकालत करता है, जनता को सवालात की ताकत देता है. 

पालीगंज के प्रायः सभी सरकारी इकाइयों में अराजकता की स्थिति है. पालीगंज एक्सप्रेस ने विधानसभा चुनाव के उपरांत पालीगंज की समस्यायों पर रामजनम शर्मा की चुप्पी की बाबत सवाल किया. रामजनम शर्मा ने पालीगंज एक्सप्रेस के आरोप को सही मानते हुए पालीगंज की समस्याओं को उठाने में असमर्थता जताई क्योंकि उनके पास समय का अभाव है. पालीगंज अनुमंडलाधिकारी की इन क्षेत्रों में कभी सक्रियता नहीं दिखी. पालीगंज के विधायक दीनानाथ यादव के विधायिकी काल में जब जनवितरण, विदयालय, अस्पताल और लोकसेवक बेहाल रहे तो अब तो उनकी राजनीती पंचायत चुनाव में लोगों को जिताने और हारने भर की रह गई है. पालीगंज के मृदुभाषी लेकिन एक हद तक स्पष्ट बोलनेवाले अशोक की चन्द्रदेव प्रसाद वर्मा के कार्यकाल में चलाती थी, लेकिन अराजक स्थितियों के निराकरण की ओर कभी जागरूक नहीं थे. अन्य कई स्थानीय स्वयंभू नेता किसी एमपी, एमएलए, मंत्री और सरकार के सिपहस्सलार होने का दावा करते रहे हैं, लेकिन नक्कारखाने में टूटी की आवाज़ भी नहीं सुनी गई. ऐसे सारे लोगों की सक्रियता ठेकेदारी, एनजीओ के नाम पर डोनेशन और भ्रष्ट लोकसेवकों की दलाली तक रही है. माइनस ठेकादारी और वृद्धपेंशन की कारगुजारी, इनका कोई योगदान नहीं दिखता. कईयों के परिवारवाले धान -क्रय केन्द्रों में दलाल रहे हैं, कईयों के नाम बैंकों की दलाली में आते रहे है. दलाली को भी जनसेवा के रूप में प्रचारित किया गया है. 

पालीगंज के विधायक का मोबाइल समाचार के प्रेषण तक स्विच ऑफ था. उनके निजी मोबाइल पर ७.४२ से ८.०२ बजे तक संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन १७ अगस्त को पालीगंज एक्सप्रेस से बातचीत में जयवर्धन यादव ने पालीगंज में व्याप्त अराजकता पर के निदान के लिए जनावेदन को निहायट जरूरी बताया था. आश्चर्य है जब एक स्थानीय विधायक को क्षेत्र भ्रमण कर जनता से समस्याओं को जानने की जरूरत महसूस नहीं होती. कमाल है क्योंकि विधायक को अपने क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी नहीं है. उन्हें पतन में जनावेदन चाहिए. गरीबों की सरकार के धनबली विधायक को इस बात का अंदाजा होना चाहिए कि भुक्तभोगी अधिकांश गरीब जनता के पास पटना आने के पैसे नहीं होते. राजद जड़ यु और कांग्रेस के प्रखंड और अनुमंडलस्तरीय दलीय इकाई है. इन इकाइयों की जिम्मेदारी भी कुछ होती है. इनकी निष्क्रियता विधायक की कमजोरी है या विधायक इन इकाइयों की उपेक्षा करते हैं. विधायक या कद्दावर दलीय नेताओं के कार्यक्रमों की तैयारी तो इन्ही इकाइयों के जिम्मे होती है और उसमें इनकी सक्रियता भी देखी जाती है. फिर कराहती जनता की आवाज़ प्रतिनिधि तक पहुंचाने में इनकी निष्क्रियता पा सवालिया निशान है.  

रामजनम शर्मा का समयाभाव, उषा विद्यार्थी की निष्क्रियता, दीनानाथ की सिमटती राजनीति, अशोक वर्मा का बुझता जातीय तिलिस्म,  नन्द कुमार नंदा के राजनीतिक जीवन पर ग्रहण, जयवर्धन यादव की जनावेदन की बहानेबाजी और ठेकेदारी, दलाली एवं हवाबाजी के बूते राजनीति में जगह बनाने को उतावली कई तथाकथिक स्थानीय झोलाछाप राजनीतिज्ञों की पालीगंज में व्याप्त अराजकता पर कभी गंभीरता नहीं देखी जा रही. मसौढ़ा के यज्ञ में उपस्थिति दर्शाने के लिए पर्याप्त समय देनेवाले राजनीतिज्ञों को क्षेत्र की अराजक गलियारों में झांकने की फुर्सत नहीं है. पालीगंज एक्सप्रेस इस मुहिम को चलाते रहेगा, लेकिन आप को कदम से कदम मिलाकर चलना होगा. आपकी सक्रियता और जागरूकता आपकी समस्याओं का अंत करेगी. 

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