पालीगंज में 26/11 को पुलिसिया तांडव.

May I Help You की धज्जियाँ उड़ा गया मुंशी आलोक.

 


सामाजिक न्याय की सरकार, सामाजिक न्याय के विधायक, महिला सशक्तिकरण का नारा और नारी एवं दलित दमन का संयुक्त घिनौना रूप. सिर्फ निंदा और हल्के आश्वासन से काम नहीं चलेगा, तानाशाहों के खिलाफ मुक्कमल कार्रवाई की जरूरत: बी. बी. रंजन.


कल शाम साढ़े पांच-छह बजे पुलिसिया पीपल फ्रेंडली का बदनुमा चेहरा पालीगंज में देखा गया. पालीगंज के लिए 26/11 काला दिवस. त्वरित कार्रवाई की जरूरत: मंजूषा रंजन. 

पीड़ित महिला.

पालीगंज मुख्यालय से महज आधा किलोमीटर पर स्थित खपुरा गाँव की मुशहरी में शराबबंदी अभियान के तहत छापेमारी करने गयी पुलिस के तांडव की खबर है. अवैध शराब विक्रय की गुप्त सूचना पर छापेमारी करनेवाली पुलिस जब खाली हाथ रह गयी 


मुंशी आलोक की खिलाफ दर्ज एफआइआर की प्रति.

तो एक महादलित महिला के ऊपर अपनी भड़ास निकाल दी. अंडा बेचनेवाली महिला दुलारी देवी ने जब शराब विक्री की जानकारी से अनभिज्ञता जाहिर की तो मुंशी आलोक कुमार ने महिला सशक्तिकरण को ललकारते हुए उसकी पिटाई कर दी. दुलारी का बाल पकड़कर आलोक ने उसे सड़क पर घसीटा. आलोक के इस तांडव का विरोध करनेवाले लोगों को भी पुलिस ने पीटना प्रारंभ कर दिया और चार लोगों की जबरन गिरफ्तारी भी हो गयी. पुलिस ने महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बक्सा. पुलिसिया तांडव के विरोध में हजारों लोगों ने रात्रि में ही अनुमंडल कार्यालय का घेराव किया, तो गिरफ्तार लोगों को मुक्त कर दिया गया और इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की ओर से आरोपी मुंशी के खिलाफ कार्रवाई का धीमा आश्वासन मिला.

मुंशी आलोक को फरियादियों के साथ अभद्र व्यवहार के लिए जाना जाता है. आलोक के खिलाफ एक पत्रकार के साथ बदसलूकी का मामला भी दर्ज है. आलोक की पत्रकारों और फरियादियों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें आतीं रहतीं है.
 

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