बी. बी. रंजन की रपट – पालीगंज: जो किसी के काम न आ सके, मैं वो एकमुश्त गुबार हूँ- यह है सुशासन के ज़माने में सरकारी अस्पतालों की कराह.

विधायकजी, ऐसा है आपके क्षेत्र का हाल .

कब खुलेगा हरेरामपुर का एपीएचसी, कब भरे जायेंगे चिकित्सकों के रिक्त पद. सरकार तो आपकी है सर! 

जनावेदन के जरिये समस्याओं को संज्ञान में लाने पर बल देते रहे जयवर्धन, लेकिन पालीगंज एक्सप्रेस के सवालों के जबाब में असहज दिखे विधायक. जब पालीगंज एक्सप्रेस मसलों को संज्ञान में लाया तो डॉक्टर्स की कमी का रोना रोने लगे विधायक, फिर अपने-पराये के फर्क को समझाने लगे. विधायक ने पहले तो एएनएम के फरारी की जानकारी मांगी और फिर जनावेदन पर उतर आये. सरकार तो आपकी है विधायक जी, क्षेत्र भ्रमण की जिम्मेदारी भी आपकी है, फिर गुहार किस से, जनता समस्याग्रसित क्यों? क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम वो इरादा…………… . २०२० भी आएगा ही. 



जयवर्धन यादव के फेसबुक के दावों की कलई खोलते उनके कार्य और आज के बयान (१७ अगस्त २०१६, १.३३ बजे मध्याहन, बी.बी. रंजन की ०४ मिनट ५३ सेकंड की बातचीत ) 

‪#‎Paliganj‬ ‪#‎JaivardhanKaPaliganj‬ ‪#‎JaiHoPaliganj‬

“उमड़ी जनसैलाब पर भावुक होते हुये अपने आखों में आँसू के बीच कहा की अगर आप सबों को मेरी खून की भी जब जरूरत पड़ेगा तो मेरी एकएक कतरा आपलोग के लिए हाजिर है “


Amlesh Kumar's photo.
Source: Facebook

इस जीत के कुछ मायने होते हैं सर! जनता की कुछ उम्मीदें होतीं हैं. विधायक की जिम्मेदारियां भी होतीं हैं.


जनसैलाब को सम्बोधित करते हुए कहाँ की मेरी पहली और आखरी प्रथमिकता पिछले 15 वर्षों से विकास के पटरी से पूरी तरह उतर चुकी यह धरती को फिर से विकास पटरी पर लायेंगे ! आप लोगों के लिए मेरे घर दरवाजे 24 घंटे खुले रहेंगे . 
उमड़ी जनसैलाब पर भावुक होते हुये अपने आखों में आँसू के बीच कहा की अगर आप सबों को मेरी खून की भी जब जरूरत पड़ेगा तो मेरी एकएक कतरा आपलोग के लिए हाजिर है !

जयवर्धन यादव कहने को तो दबंग छवि के कद्दावर राजनेता स्व. रामलखन सिंह यादव के पौत्र हैं. विरासत में इन्हें राजनीति मिली है. पालीगंज से मिली जीत में रामलखन यादव और लालू प्रसाद के प्रभाव का मिश्रित असर है. दिल्ली में पढ़नेवाले जयवर्धन का व्यक्तिगत रूप से क्षेत्र से कोई पुराना लगाव नहीं रहा है, लेकिन राजद के पक्ष में जातीय गोलबंदी और मोहन भागवत के बयान के असर का लाभ इन्हें भी मिला है. क्षेत्र में उषा विद्यार्थी के तथाकथिक तानाशाही रवैये और रामजनम शर्मा की क्षेत्र पर कमजोर पकड़ और दलित-पिछड़े मतदाताओं का रामजनम के प्रति अलगाव जयवर्धन के लिए लाभप्रद रहा था. रही-सही कसर रामजनम के चुनावी कुप्रबंधन ने पूरी कर दी थी.  

लगातार दो चुनाव हारकर तीसरी बार फतह पानेवाले जयवर्धन का क्षेत्र में अब तक कोई योगदान नहीं दिखा है. उन्हें अपनी काबिलियत साबित करनी होगी. पालीगंज में समस्याएं अनगिनत हैं. बुनियादी सुविधाओं में शिक्षा-व्यवस्था चौपट है. स्कूलों में प्रयोगशाला का आभाव है, योग्य शिक्षकों की कमी है. स्कूल समय के पाबंद नहीं हैं, अधिकारियों की उपस्थिति मनामानीपूर्ण है. स्वास्थ्य विभाग की सेहत बहुत खराब है. डॉक्टर्स की घोर कमी है. कई अस्पताल खाली हैं. कई उपकेंद्रों के ताले नहीं खुलते. कई अतिरिक्त पीएचसी पर चिकित्सकों की तैनाती नहीं है. कई जगह तैनात चिकित्सक कभी आते ही नहीं. समदा में पोस्टेड रेखा सिंह पटना में रहतीं हैं और अस्पताल रोजाना बंद मिलता है. हद तो तब हो जाती है जब हरेरामपुर एपीएचसी में एक भी डॉक्टर के पदस्थापित नहीं रहने की सूचना आती है. हरेरामपुर विधायक जयवर्धन का गाँव है. जब चिराग तले अँधेरा हो तो बाकि क्षेत्र की स्थिति समझी जा सकती है. तमाम स्वास्थ्य उपकेन्द्र बंद है. कोई-कोई सप्ताह में एक दिन खुल जाए और वह भी एक-दो घंटे के लिए तो गनीमत समझिए. विधायक की अभी तक कोई आवाज़ नहीं सुनी गयी. सरकार राजद-जदयू-कांग्रेस की है. पूरा महागठबंधन गरीबों के मसीहा होने की छवि दर्शाता रहा है. सामाजिक न्याय के बड़े-बड़े दावे किये जाते रहे हैं. स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपलब्धियों को कई बार गिनाया जा चुका है, लेकिन पालीगंज विधानसभा क्षेत्र की जनता को सरकारी अस्पतालों की सुविधा नहीं मिलती. महंगे चिकित्सकों और गोरखधंधे में संलिप्त स्थानीय निजी नर्सिंग होमों की शरण में उन गरीबों को भी जाना पड़ता है जिनके उद्धारक होने का गठबंधन दावा करता है. सरकार के इस रवैये से जान की कीमत का महत्व समझा जा सकता है, सरकार की गरीबों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता समझी जा सकती है.

दुल्हिनबाजार रेफ़रल अस्पताल में चिकित्सकों के तीन पद हैं, लेकिन एक खाली है. सावित्री सिंह और दूधनाथ पाण्डेय नामक दो चिकित्सक पदस्थापित हैं. दुल्हिनबाज़ार पीएचसी में डॉ. आलोक कुमार सिन्हा और शिवचंद्र प्रसाद जायसवाल अनुबंध पर पदस्थापित  हैं. इस अस्पताल में कुल चार डॉक्टर्स की अनुबंध पर नियुक्ति हो सकती है, लेकिन दो पद खाली है. हरेरामपुर, भरतपुरा और काब स्थित एपीएचसी में चिकित्सकों के दो-दो पद हैं, लेकिन सभी छह पद खाली हैं. इन तीनों अस्पतालों में अनुबंध पर भी तीन चिकित्सकों की नियुक्ति करनी है, लेकिन सारे पद खाली हैं. पालीगंज में तीन एपीएचसी हैं. समदा, कोदहरी और अकबरपुर में एपीएचसी हैं. तीनों केन्द्रों पर चिकित्सकों के दो-दो पद हैं, लेकिन समदा में सिर्फ एक चिकित्सक डॉ. रेखा सिंह को छोड़कर शेष तीन सीटें रिक्त हैं. रेखा फरारी के लिए जानी जातीं हैं. पटना में उनका निजी क्लिनिक खूब चलता है. अकबरपुर में दो आयुष डॉक्टर जयप्रकाश सिंह और मुर्तजा अंसारी पदस्थापित हैं. 

अनुमंडलीय अस्पताल पालीगंज में डॉ. चन्द्रदीप कुमार उपाधीक्षक तो हैं, लेकिन फिजिसियन और जेनरल सर्जन के चारों पद खाली हैं. कुमारी सुनीता प्रभाकर नामक एक ग्यानोकोलोजिस्ट तो कार्यरत हैं, लेकिन दूसरा पद रिक्त है. चरम रोग का एक पद है लेकिन रिक्त. शिशु चिकित्सक के दोनों पद रिक्त है. एनेस्थेसिया के दो पद हैं, लेकिन एक रिक्त है. डॉ. रविशंकर रत्नाकर पदस्थापित हैं. नाक-कान-गला और नेत्र विभाग के दोनों पद रिक्त हैं. हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है और  रेडियोलोजी विभाग में दोनों पद खाली हैं. जनरल एवं महिला विभाग में चिकित्सकों के कुल नौ पद हैं. डॉ. अशोक कुमार, शिवलाल चौधरी और उमाशंकर प्रसाद को छोड़कर शेष छह पद खाली हैं. दन्त विभाग और पैथोलॉजी विभाग में चिकित्सकों के एक-एक पद सैंक्शन हैं, लेकिन दोनों रिक्त  हैं. आयुष चिकित्सक के दोनों पद रिक्त हैं. पालीगंज पीएचसी में चारों चिकित्सक मौजूद हैं. डॉ. पुष्पेन्द्र बिक्रम सिंह, डॉ. अर्चना, कुमार रविशंकर और एसएस राय पालीगंज में पदस्थापित हैं और चारों अनुबंध पर हैं. 

मामले पर विधायक जयवर्धन यादव की प्रतिक्रिया जानने के लिए उनसे मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल उठानेवाले शख्स ने विधायक के सदन में होने की बात कही.

समाचार प्रकाशन के दिन पालीगंज के विधायक  से बात नहीं हो सकी, लेकिन दुसरे दिन बच्चा यादव ने बड़ी शालीनता के साथ काग्क की डॉक्टर्स की कमी है इसलिए चिकित्सकों के पद खाली हैं. चिकित्सकों के खहली पद को भरने के लिए उनकी सरकार की गैरजिम्मेदारी पर बच्चा बचते दिखे. बकौल जैवर्धन हरेरामपुर में डॉक्टर्स की पोस्टिंग करने पर गाँव के नाते उन्हें आरोपित किया जायेगा. दूसरी जगह पोस्टिंग कराने पर उनके गाँव की स्थिति पर उनसे सवाल होगा. डॉक्टर की पोस्टिंग के सवाल पर अपनी सरकार का बचाव करने में विधायक असहज दिखे. इ एन एम की अनुपस्थिति पर बच्चा यादव ने गंभीरता दिखने की कोशिश की लेकिन कल्याणपुर, सियारामपुर, मसौढ़ा जैसे तमाम उपकेंद्रों की बंदी के बाबत पालीगंज एक्सप्रेस के सवाल के जबाब में काफी कुछ नहीं बोल पाए. जनावेदन के जरिये समस्याओं को रखने पर कार्रवाई का आश्वासन देते हुए  विधायक जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते रहे. विधायक ने पालीगंज एक्सप्रेस को मामला संज्ञान में लाने की बात कही, लेकिन एक विधायक के नाते क्षेत्र का दौरा कर समस्याओं को संज्ञान में लेने की पालीगंज एक्सप्रेस की सलाह पर ज्यादा कुछ नहीं बोल पाए बच्चा  यादव. 

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