बंद मिला कौरी का स्वास्थ्य उपकेन्द्र. जब जनप्रतिनिधि शिथिल हों जाएँ तो मीडिया को जिम्मेदारी निभानी पड़ती है: बी. बी. रंजन


उपकेन्द्र पर लोगों का अवैध कब्ज़ा भी, घास और भूसा रखने के काम आता है भवन.
 विडियो फुटेज में दिखा उपकेन्द्र में खटिया, परिसर में पुआल का गांज और कमरे में भूसा. 
कौरी से संजय की रिपोर्ट

जब जनप्रतिनिधि शिथिल हों जाएँ तो मीडिया को जिम्मेदारी निभानी पड़ती है: बी. बी.  रंजन 

अभी-अभी सायं 4.55 बजे पालीगंज अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक शिवलाल चौधरी ने बताया की अस्पताल प्रबंधन और अनुमंडलाधिकारी की बात हो गई है और जांच के लिए टीम निकल रही है. बुधवार को अस्पताल प्रबंधन पालीगंज एक्सप्रेस को कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट सौपेगा- डॉ. शिवलाल चौधरी.

कौरी गाँव में वर्षों पुराना स्वास्थ्य उपकेन्द्र है. रमेश शर्मा सहित कई ग्रामीणों ने बताया की कोई भी एएनएम 20-25 वर्षों से नहीं आती है. गाँव के ही रमेश शर्मा, नरेश शर्मा, विश्वनाथ यादव, सर्वदेव शर्मा, चीतेश्वर शर्मा और शिवकुमार शर्मा ने एक स्वर से अपनी व्यथा सुना डाली. ग्रामीण चिकित्सा के लिए पालीगंज जाने को मजबूर हैं. कौरी पालीगंज से दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक सुदूरवर्ती गाँव है जहाँ आना-जाना न तो सुरक्षित है और न ही आवागमन का कोई साधन है. नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में नरसंहार और हत्याओं का सिलसिला चलते रहा है. पालीगंज तक पहुँचने के लिए खिरी मोड़ तक पैदल चलना ही होता है. खीरी मोड़ से पालीगंज के लिए जीप की सुविधा है, लेकिन दिन के उजाले में. रात्रि में बीमारी आयी तो भगवान का नाम जपने के सिवा कोई रास्ता नहीं दिखता.
जर्जर उपकेन्द्र में खिड़की और दरवाजे नहीं हैं. अस्पताल का अपना भवन है, लेकिन परिसर और भवन में घास जम गए हैं. परिसर लम्बा है, लेकिन उपकेन्द्र के बरामदे पर किसी ग्रामीण का कब्ज़ा है. कमरे में भूसा और बरामदे पर खटिया बिछी हुई है, जिस पर लोग सोते हैं. परिसर में पुआल का गांज है. कुल मिलाकर देखने में परिसर पर किसी व्यक्ति का अघोषित कब्ज़ा-सा लगता है. परिसर निजी कार्य में आता है. कभी ग्रामीणों ने बड़ी उम्मीद के साथ अपने वारिशों की सुविधा के लिए जमीन दान में दी थी और जूनून के साथ अस्पताल का निर्माण हुआ था. आज सुशासन बाबू के खोखले दावों के बीच कौरी का उपकेन्द्र वीरान है, ग्रामीणों का जूनून ठंडा है. बच्चा बाबू क्षेत्र के विधायक हैं. राजनीति उन्हें विरासत में मिली है. जयवर्धन सामाजिक न्याय की पार्टी से जीत कर आये हैं. गरीबों के मसीहा होने के लालू के दावों की पोल खोलता है यह उपकेन्द्र, क्योंकि कौरी गाँव में मांझी जातिवालों की संख्या बेशुमार है, इनके अस्सी घर हैं. यादवों के लगभग बारह घर हैं और भूमिहार के पचास घर. गाँव में कोइरी जातिवालों के पांच-छह घर, ठाकुर दो घर और पासवान के दस घर हैं.
सरकार के दावों के बीच अनुमंडलीय अस्पताल के अधीक्षक और पालीगंज के अनुमंडलाधिकारी की कमाल की शिथिलता है. एएनएम सहित अन्य लोकसेवकों को वेतन नियमित मिलता है, जनता की सेवा में उनके नियमित संलग्न रहने की रिपोर्टें विभाग को भेजी जातीं हैं और जनता कराह के साथ भगवान को याद करती है. लगभग पचास हजार रूपये सरकारी खजाने से खर्च होता है जिससे उपकेन्द्र में पदस्थापित सेवकों का घर तो अच्छा से चल जाता है, लेकिन उपकेन्द्र अपनी वीरानी पर रोता है. स्थानीय या पंचायत प्रतिनिधियों की आवाज़ भी कभी नहीं सुनी गई. स्वास्थ्य विभाग का महकमा कभी इस केंद्र की सुधि भी लेने नहीं आया. न कोई जांच, न कोई औचक निरीक्षण. कहने को गरीबों की हितैषी सरकार है, सरकार में दलित चिंतकों और पिछड़ों के शुभचिंतकों की जमात है.
संजय की रिपोर्ट पर बी.बी. रंजन ने इस मसले पर पालीगंज के अनुमंडलाधिकारी और अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक से बात की. उपाधीक्षक ने ए एन एम से स्पष्टीकरण पूछकर ए एनएम को सुधरने की नसीहत देने की बात कही और नकारात्मक रहने पर कड़ी कार्रवाई करने का भरोसा दिया. बकौल उपाधीक्षक इस कड़ी कार्रवाई में निलंबन भी संभावित है. उपाधीक्षक ने नरमी के साथ फरार एएनएमों की सूची उच्चाधिकारी को भेजने का आश्वासन दिया. मामले पर पालीगंज के अनुमंडलाधिकारी ने गंभीरता दिखाई और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया. उन्होंने कॉल बैक कर बी.बी. रंजन से  एएनएम का नाम और नंबर भी देने का अनुरोध किया. उपाधीक्षक ने अनुमंडलाधिकारी को अपने मैनेजर के माध्यम से नंबर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. बकौल उपाधीक्षक नंबर उपलब्ध कराने के बाद अनुमंडलाधिकारी एवं अस्पताल प्रबंधन की बात हो गई है और जांच टीम निकल रही है. बुधवार को डॉ. चौधरी ने पालीगंज एक्सप्रेस को कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट सौपनें का आश्वासन दिया है. 
जब जनप्रतिनिधि शिथिल हों जाएँ तो मीडिया को जिम्मेदारी निभानी पड़ती है.  

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