बिक्रम विधानसभा क्षेत्र: कराहते सरकारी अस्पताल और सिद्धार्थ का टूटता तिलिस्म

सिद्धार्थ का टूटता तिलिस्म………..

अपेक्षाओं  पर खड़ा उतरने की चुनौती 
…………………..सिद्धार्थ सिंह यों विधायक तो सरकारी दल के हैं और ऊपर से युवा, लेकिन बहुचर्चित विधायक के अब तक के कार्यकलाप सुखद तो नहीं दिखते. रामजनम, अनिल  और उषा के कार्यकाल में भी बंद रहे अस्पताल. विधायक जी! सरकारी अस्पतालों की सेवा तो गरीबों और निरीहों को ही लेनी पड़ती है. आपकी सामाजिक न्याय की सरकार का यह कौन-सा चेहरा है, जनता जानना चाहती है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी फरार एएनएम और चिकित्सकों की नियमित ड्यूटी का फर्जी प्रमाण देकर नियमित वेतन भुगतान तो करते हैं. पटना में क्लिनिक चलानेवाले चिकित्सक नौबतपुर और बिक्रम के अस्पतालों से वेतन लेते हैं, लेकिन गरीब क्वेक्स के हाथों हलाल होते हैं. पिछड़ों, गरीबों और दलितों की सरकार का यह कैसा स्वरूप है? सामाजिक न्याय एक्सप्रेस तो पैसेंजर से भी खास्ताहाल है.  ……. uploading 

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