बिहार में सरकार समर्थित गुण्डा राज

शहाबुद्दीन की वापसी और अनंत पर सीसीए की पिछले चार दिनों से चल रही चहलकदमी के बीच जनमानस का ऐसा ही कहना है. बिहार के दुर्दांत बाहुबली की खतरनाक शैली और जींस धारण करने की धमकी से तो ऐसा ही लगता है. नीतीश पर बाहुबली का फ़ौरन कटाक्ष और लालू के प्रति भक्ति से भी शासन पर लालू की मजबूत पकड़ और नीतीश की विवशता एक बार फिर मुहर लगी है. 

शहाबुद्दीन के पीछे गाड़ियों का काफिला और जनसैलाब बिहार के मतदाताओं की मानसिकता और बिहार में लोकतंत्र के उड़ते माखौल पर सवालिया निशान खड़ा कर गया है. कदम-कदम पर एक बाहुबली की ताजपोशी और सफ़ेद वस्त्र से जीन्स में लौटने की धमकी से लोकतंत्र शर्मशार होता रहा. एक ओर पत्रकार राजदेव की पत्नी आशा बिहार सरकार से निराशा का इजहार करते हुए दिल्ली में सीबीआई जांच की मांग कर रही थी तो दूसरी ओर वही सिवान एक बाहुबली की पूजा-अर्चना में व्यस्त था. 

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