मसौढ़ा: जहाँ नहीं खुलता स्वास्थ्य उपकेन्द्र

ग्रामीणों ने कहा: मैंने कभी भी इस केन्द्र को खुलते नहीं देखा.
(आज प्रातः 7.24 बजे अस्पताल उपाधीक्षक को पूरी जानकारी दी गयी और उनका बयान लिया गया. लगभग  8 बजे प्रातः समाचार प्रकाशित कर दिया गया. 11.03 दोपहर में अस्पताल के प्रबंधक का कॉल आया और फिर तीन बार बात हुई. प्रबंधक ने उपाधीक्षक से मंत्रणा कर कल से सख्ती बरतने का आश्वासन दिया. शाम 4.02 और 4.13 बजे क्रमशः उपाधीक्षक और प्रबंधक के मोबाइल पर मैसेज भेजकर पालीगंज एक्सप्रेस साईट और समाचार के प्रकाशन की एक बार फिर जानकारी दी गयी.)

विडियो फुटेज देखने के लिए के लिए क्लिक करें: 


Untitled picture

किसी ने कहा: सप्ताह में एक दिन दस बजे खुलता है एचएससी.

Masaudha 4
खुलता है सप्ताह में एक दिन दस बजे: मसौढ़ा मठिया के बुजुर्ग का बयान.









लगभग मासिक चालीस हजार वेतन और दवाओं पर व्यय, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र खुलता है सप्ताह में एक दिन दो घंटों के लिए. हैरानियत है कि गांववालों ने इसे अपनी नियति मान ली है.  जनप्रतिनिधियों और तंत्र की शिथिलता के आगे अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं से समझौता 
Masaudha 3
बंद स्वास्थ्य उपकेन्द्र की तस्वीर पालीगंज एक्सप्रेस के कैमरे में कैद. जी हाँ! सरकारी मकान, दो लोगों की पोस्टिंग और लगभग 40 हजार रूपये की तनख्वाह, लेकिन बदहाल लोग. मैंने कभी एचएससी को खुला नहीं देखा.

कर लिया है. क्यों मतदान करते हैं मतदाता? क्यों चुनते हैं शिथिल प्रतिनिधि? चार शाम की कचौड़ी पर बिकनेवाले लोकतंत्र का हाल, जनता बेहाल. जी हाँ! मसौढ़ा स्वास्थ्य उपकेंद्र पर व्याप्त अराजकता से तो ऐसा ही लगता है.


सरकारी भवन में संचालित मसौढ़ा का स्वास्थ्य उपकेन्द्र कभी नहीं खुलता. जी हाँ! स्वास्थ्य उपकेन्द्र के बगल में मठिया टोला के एक व्यक्ति ने ऐसा ही कहा. दूसरे बुजर्ग ने सप्ताह में एक दिन एचएससी के खुलने की बात तो कही, लेकिन दस बजे. बता दें की एचएससी पर एएनएम की ड्यूटी 24×7 की बतायी जाती है, लेकिन गाँववालों और बगलगीरों के अनुसार स्वास्थ्यकर्मी सप्ताह में एक दिन महज दो-तीन घंटों के लिए आते हैं.

पालीगंज में बैठे स्वास्थ्य उपाधीक्षक को सारी बातों की जानकारी है. अनुमंडलाधिकारी सारी करतूतों से अवगत हैं. विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधि इन समस्याओं से भलीभांति परिचित हैं, लेकिन बंद एचएससी के पट को खुलवाने और नियमित संचालित कराने के लिए किसी ने कभी कोशिश नहीं की. 

पालीगंज एक्सप्रेस के सम्पादक बी. बी. रंजन ने आज 7.24 बजे प्रातः उपाधीक्षक से बात की. उपाधीक्षक ने मसौढ़ा में दो स्वास्थ्यकर्मी के कार्यरत होने की बात कही है. बकौल उपाधीक्षक दोनों के वेतन पर कम-से कम मासिक 40,000 रूपये का खर्च आता है. दवाओं पर इसके अतिरिक्त खर्च हैं.

पालीगंज एक्सप्रेस ने उपाधीक्षक को फरार कर्मियों की जानकारी दी और उपाधीक्षक को साफ़-साफ़ कहा गया कि एचएससी के संचालन में कोताही आपकी जानकारी और सहमति से होता है.

आश्चर्य है की बगल में बैठे उपाधीक्षक और अनुमंडलाधिकारी को इसकी जानकारी नहीं है. पालीगंज का एक भी स्वास्थ्य केंद्र सुचारू नहीं है. पालीगंज एक्सप्रेस ने कौरी और सियारामपुर का मसला भी उठाया था और तब उच्चाधिकारियों ने जांच भी कराई थी. तब चन्द दिनों तक स्वास्थ्य उपकेन्द्र खुला भी था. मैंने सियारामपुर और कौरी के ग्रामीणों से अनियमितता की स्थिति में सूचना देने का निवेदन भी किया था, लेकिन गांववालों की सक्रियता सामने नहीं आयी. सतर पार कर चुके बुजुर्ग शख्स ने तो यहाँ तक कह दिया की मेरी राजनीतिक पाली समाप्त हो गयी है, इसलिए मैं ऐसा क्यों करूँ.  पालीगंज एक्सप्रेस की ओर से बी. बी. रंजन ने जयवर्धन यादव से भी  बात की थी, लेकिन उनका टालमटोल भरा अधूरा आश्वासन सामने आया था. ‘जनसमस्याओं पर जयवर्धन को जनावेदन चाहिए’ की खबर आज भी पालीगंज एक्सप्रेस पर मौजूद है.

उपाधीक्षक के अनुसार एएनएमको 8 बजे से 12 बजे तक स्वास्थ्य उपकेन्द्र पर उपस्थित रहना है और 12 बजे के बाद क्षेत्र भ्रमण के लिए निकलना है. सप्ताह में एक दिन आनेवाली एएनएम भी क्षेत्र भ्रमण के नाम पर केन्द्रों से महज आधे घंटे में निकल जाती है. इस पूरे प्रकरण में उपाधीक्षक और स्वास्थ्यकर्मियों की मिलीभगत, स्थानीय प्रतिनिधियों की गैरजिम्मेदारी और अनुमंडलाधिकारी की शिथिलता परिलक्षित होती है. सक्रियता और जांच के आश्वासनों से लबरेज बयान टालमटोल भर हैं. लेकिन सभी लापरवाह हैं और तमाम लोगों की मिलीभगत से एचएससी पर अराजकता कायम है. गांववालों कीकुम्भकर्णी निद्रा भी कम जिम्मेदार नहीं है.

One thought on “मसौढ़ा: जहाँ नहीं खुलता स्वास्थ्य उपकेन्द्र

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *