सुशासित सरकार की ऐसी चाल , पालीगंज के सरकारी डिपो का खास्ता हाल

जनता जनप्रतिनिधियों को क्यों चुनती है?



Amlesh Kumar's photo.
Source: Facebook

 पालीगंज में बसों को चलवाने का श्रेय विधायक को ,तो नौबतपुर में  बसों को बंद कराने की जिम्मेदारी किसकी?

     दोनों महागठबंधन के नायक हैं.

Source: Internet

Mla Siddharth's profile photo

 *पालीगंज से संजय की रिपोर्ट



Image result for overcrowded buses in bihar

पालीगंज में बिहार राज्य पथ परिवहन निगम का एक डिपो Image result for bihar state bus transportहै या भग्नावशेष, यह कहना जरा मुश्किल लगता है. ऐसे पांच-छह सरकारी बसों का परिचालन प्रारंभ हुआ है. लेकिन डिपो का भग्नावशेष ही बचा है. एक खण्डहर से ज्यादा कुछ भी नहीं. न तो यात्रिओं के बैठेने की जगह है, न ही क्षण भर रूकने के लिए कोई छायादार स्थल. चाहरदीवारी भी टूट चुकी है. इसे डिपो कहना मुश्किल लगता है. यह पूरी Image result for bihar state bus transportतरह कचरा घर लगता है और कचरा फेकने के काम भी आता है.

पालीगंज सत्ताधारी विधायकों और मंत्रियों का क्षेत्र रहा है. रामलखन सिंह यादव, चंद्रदेव प्रसाद वर्मा, दीनानाथ सिंह यादव, उषा विद्यार्थी और अब जयवर्धन यादव सत्ताधारी दल के विधायक रहे हैं. रामलखन सिंह यादव और चंद्रदेव प्रसाद वर्मा राज्य और केंद्र सरकार में दमदार


Image result for bihar state bus transport


मंत्री रह चुके हैं. बलिराम भगत भी इस क्षेत्र की शोभा बढ़ाते रहे हैं. लेकिन सरकारी डिपो के हालात इन नेताओं की सक्रियता और जनता के प्रति समर्पण की वास्तविक तस्वीर पड़ोसन के लिए काफी है. यह डिपो जनता की दुर्दशा और सरकार की उदासीनता  को बयां करता है.

पालीगंज में रूक-रूक कर सरकारी बसें चलतीं रहतीं है. 1995-96 में पटना-डाल्टनगंज की कुछ रात्रि-सेवा की बसें चलतीं थीं और 2006 तक एक-दो बसें मिल जातीं थीं. पालीगंज में इनका ठहराव नहीं था. एक लम्बे इंतजार के बाद 2001-02 के दौर में परिवहन निगम की बसों का परिचालन प्रारंभ हुआ तो निजी बसों में बैठने को यात्री तैयार नहीं थे. बसों की समय- सारणी में लापरवाही बढ़ी और यात्री मुंह मोड़ने लगे. धीरे-धीरे सभी बसें औरंगाबाद-पटना में तब्दील कर दीं गईं. दो वर्षों के अन्दर ही औरंगाबाद से भी बसों का परिचालन लगभग बंद हो गया. फिर निजी बसों को परिवहन विभाग के अधीन लाया गया. औरंगाबाद रूट को ऐसी कुछ बसें मिलीं थी.

बहरहाल हुडको द्वारा संचालित कुछ बसें पालीगंज को मिलीं हैं. विधायक के सिपहसालार इसका श्रेय विधायक को दे रहें हैं. लेकिन जनता को यह नहीं बताया जा रहा कि जब बसें बंद हो जातीं हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसे दी जायेगी. जब बस चलवाने का श्रेय विधायक को दिया जाता है तो बंद करानेवाले कौन से लोग हैं. विपक्ष के द्वारा साजिश का घिसा-पीटा जुमला कब तक चलेगा?

बगल के नौबतपुर में हुडको की चलन्त बसें बंद हो गईं. बिक्रम से कांग्रेस के दबंग विधायक सिद्धार्थ के जमाने में भी बंद हो चुकी इन बसों का परिचालन प्रारंभ नहीं हो सका. बसें बंद भी इसी सरकार के कार्यकाल में हुईं. बसों का चलना भाजपा विधायक के काल में प्रारंभ हुआ था. पटना के यात्रियों ने राहत की सांस ली थी. सत्ता के सिपहसालारों को बताना चाहिए कि नौबतपुर से बसों के परिचालन को बाधित करने की जिम्मेदारी किसकी है? महागठबंधन की सरकार है. कांग्रेस, राजद और जद यू  की मिलीजुली सरकार है.  ताली कप्तान को, तो गाली किसे? आम जनों को सिपहसालारों के जबाब की प्रतीक्षा है.

PHOTO: Source Internet

 

 

One thought on “सुशासित सरकार की ऐसी चाल , पालीगंज के सरकारी डिपो का खास्ता हाल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *